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हिंदी न्यूज़ – सबसे बड़ा आॅनलाइन फ्रॉड गैंग एफबीआई के हाथ लगा | fbi nabs alleged hackers in theft of 15m credit cards


तीन दोस्त थे और तीनों में कुछ खूबियां थीं. एक सर्वर और आॅनलाइन कम्युनिकेशन का जानकार था, दूसरा बहुत ही शातिर हैकर था और तीसरा इन दोनों के हुनर का इस्तेमाल करने और कारोबार करने के गुणों की खान था. इन तीनों ने मिलकर जब अपराध का रास्ता चुना तो दुनिया भर में तहलका मचा दिया. पिछले पांच सालों से नाक में दम करने वाली इन तीनों की आॅनलाइन चोरी की कंपनी का पर्दाफाश हुआ तो एफबीआई यह जानकार हैरान रह गई कि इन्होंने करोड़ों लोगों के साथ ठगी और धोखाधड़ी कर दी है.

कुछ साल पहले एंड्री जब सर्वर और कम्युनिकेशन के मास्टर फिदिर से मिला तो उसे इसके हुनर ने आकर्षित किया. एंड्री ने कुछ समय में यह पता कर लिया कि फिदिर बहुत सावधानी और चतुराई से एक साथ कई सर्वरों को मेंटेन कर सकता है और इनके कम्युनिकेशन पर पूरी निगरानी रख सकता है. इसी बीच एंड्री को अपने बेमिसाल हैकर दोस्त दिमित्रो का खयाल आया. एंड्री के ज़रिये तीनों आपस में दोस्त बने और तीनों ने बड़ा गेम खेलने की इच्छा ज़ाहिर की.

कई तरह के आइडियों पर सोचने के बाद तीनों इस बात पर सहमत हो गए कि वो डायरेक्ट क्राइम करने का जोखिम नहीं लेंगे. तीनों को यह आइडिया जंचा कि कमीशन बेस्ड आॅर्गनाइज़्ड क्राइम का रास्ता कम जोखिम भरा भी है और इसमें अच्छी खासी दौलत का रास्ता भी है. एंड्री ने ज़िम्मा लिया कि वह पेशेवर आॅनलाइन अपराधियों से संपर्क करेगा और उन्हें काम की जानकारियां बेचने के बारे में डील करेगा. इधर, इन दोनों ने इस काम को अंजाम देने के लिए एक पूरा आॅनलाइन रैकेट तैयार करने का बीड़ा उठाया.

फिदिर, दिमित्रो और एंड्री, इन तीनों ने करीब चार साल पहले यानी 2014 के आसपास एक फर्ज़ी आॅनलाइन कंपनी बनाई और पूरी साज़िश के साथ लूट और ठगी को अंजाम देने की कवायद शुरू की. इन तीनों ने और कुछ लोगों को अपने इस प्लैन में शामिल किया लेकिन वो सभी एक तरह से जॉब पर रखे गए थे जिन्हें इनके ‘बड़े गेम’ के बारे में कुछ पता नहीं था. अब पूरा नेटवर्क तैयार था. एंड्री के हाथ में आॅनलाइन फ्रॉड करने वाले शातिर अपराधियों के साथ हुई डील थी, दिमित्रो हैकिंग के लिए तमाम उपकरणों और सॉफ्टवेयरों के साथ तैयार था और फिदिर इन सूचनाओं को अपराधियों के साथ साझा करने के लिए सारे सर्वरों को मेंटेन कर रहा था.यह शुरुआत करने से पहले तीनों ने कई जगहों पर जाकर निगरानी और कुछ वक्त स्टाफ के साथ बिताकर कई तरह की नेटवर्किंग जानकारियां हासिल कर ली थीं. अब तीनों ने निशाना चुन लिया था और अमेरिका के शहरों में चेन या फ्रेंचाइज़ी के रूप में चलने वाले होटलों, रेस्तराओं और गेम ज़ोन्स पर इन्होंने जाल बिछाने की तकनीक जुटा ली थी. काम बहुत आसान नहीं था लेकिन इन शातिरों ने उसे अंजाम देने का पूरा प्लैन तैयार किया था. ऐसी फ्रेंचाइज़ी को एक मेल करने के बाद सर्विलांस और हैकिंग की जाना थी.

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प्लैन यही था कि ऊपर दिए गए ग्राफिक में दर्ज ईमेल की तरह के संदेश इन फ्रेंचाइज़ी को भेजे जाने थे. इन मेल्स और अटैचमेंट में कुछ मैलवेयरों को इस तरह इंस्टॉल किया गया था कि जैसे ही ये मेल फ्रेंचाइज़ी के आॅफिशियल मेल आईडी से खोले जाएंगे, वैसे ही उनके सिस्टम में दर्ज पूरा आॅनलाइन ब्योरा हैक कर लिया जाएगा. यानी एक फ्रेंचाइज़ी के पास कस्टमरों का जितना डेटाबेस है, वह पूरा हैकिंग के ज़रिये चुरा लिया जाएगा.

एक पूरी टीम को सर्विलांस के लिए लगाया गया था और फ्रेंचाइज़ी में मेल खुलते ही दिमित्रो का काम था हैकिंग करना. हैकिंग के लिए और हैकिंग के बाद मिलने वाले डेटा को अपराधियों के साथ साझा करने के लिए नेटवर्क और सर्वर मेंटेन करने का ज़िम्मा था फिदिर का. इस पूरे काम के सुपरविज़न और अपराधियों के साथ डील एंड्री की ज़िम्मेदारी थी. पहला प्रयोग फेल हुआ क्योंकि ऐन वक्त पर सिस्टम और टीम कॉर्डिनेशन ठीक से नहीं हो पाया.

लेकिन अगला प्रयोग सफल हुआ और धंधा चल पड़ा. पहली कामयाबी में ही दर्जनों क्रेडिट व डेबिट कार्डों के डिटेल्स हैक हो गए और दिमित्रो, फिदिर और एंड्री को बगैर ज़्यादा जोखिम के इस धंधे का रास्ता मिल गया. तीनों ने धीरे-धीरे कई और लोगों को इस धंधे में जोड़ा और कई फर्ज़ी आॅनलाइन कंपनियां बनाईं. जिस कंपनी के तहत ये लोग अपना धंधा चलाते रहे यानी पेरेंट कंपनी का नाम था एफआईएन7.

मैलवेयर और हैकिंग का शिकार होने वाले समूहों या स्टोर्स ने समय-समय पर शिकायतें दर्ज करवाईं लेकिन कोई क्लू नहीं मिला. कई बार शिकायतों के बावजूद पुलिस इन तीनों तक नहीं पहुंच पाई थी इसलिए इनके हौसले बुलंद होते चले गए. पिछले चार सालों में अमेरिका और यूरोप के करीब 50 शहरों में 100 से ज़्यादा कंपनियों को चूना लगाते हुए एफआईएन7 नाम की इस कंपनी ने डेढ़ करोड़ से ज़्यादा क्रेडिट व डेबिट कार्डों के ब्योरे चुराकर आॅनलाइन फ्रॉड करने वाले अपराधियों को बेचे, ऐसा एफबीआई का कहना है.

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दरअस्ल, पिछले साल 2017 में अमेरिका के लोकप्रिय फूड चेन चिपॉटल ने साइबर क्राइम शाखा के पास इस तरह की शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके सिस्टम को मैलवेयर या किसी किस्म की कुकीज़ के ज़रिये हैक किया गया है. चिपॉटल ने एक बयान जारी करते हुए ग्राहकों को सावधान रहने की हिदायत भी दी थी. इस मामले की जांच जारी थी, वहीं इसी साल करीब तीन महीने पहले एक और अमेरिकी फूड चेन चिली’ज़ ने भी ऐसी ही शिकायत दर्ज करवाई.

तफ्तीश जारी रही और मामला इतना बड़ा था कि एफबीआई को इसमें कूदना पड़ा. इसी साल फिदिर को जर्मनी से गिरफ्तार किया गया. इसके बाद दिमित्रो को पोलैंड में एंड्री को इसी साल जून में स्पेन में गिरफ्तार कर लिया गया है. तीनों ही यूक्रेन के रहने वाले हैं और ये तीनों एफआईएन7 नाम की इस फ्रॉड कंपनी के सूत्रधार बताए जा रहे हैं. एफबीआई ने अब तक हुई तफ्तीश के हिसाब से सामने आए आंकड़े जारी किए हैं जो चौंकाने वाले हैं.

सतर्क और जानकार बने रहें
इंटरनेट पर दुनिया की भौगोलिक सीमाएं नहीं हैं इसलिए ऐसे फ्रॉड कभी भी आप तक पहुंच सकते हैं. इस तरह के ईमेल्स अगर आपके इनबॉक्स में आएं तो सतर्क रहें और किसी लालच में न आते हुए इन्हें इग्नोर करें. जॉब दिलाने, लॉटरी लगने, निवेश या रकम को दुगना या चौगुना करने, वर्क फ्रॉम होम या गेम्स खेलने जैसे कई ईमेल्स के ज़रिये फिलहाल भारत में इस तरह के कई आॅनलाइन फ्रॉड किए जा रहे हैं. आॅनलाइन फ्रॉड को पकड़ पाना अब भी सालों लंबी प्रक्रिया है और बेहद मुश्किल. और, इन फ्रॉड के ज़रिये आपका जो पैसा डूबता है, वह वापस मिलने की तो कोई उम्मीद ही नहीं होती इसलिए सतर्क और जानकार बने रहना ही फिलहाल बचने का उपाय है.

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